आपदा के ग्यारह वर्ष बाद केदारनाथ मंदिर तक पहुंच के लिए स्थायी पैदल पुल बनकर तैयार हो चुका है. इस साल बाबा केदार के भक्त अपने अराध्य के दर्शन के लिए इसी पुल से होकर मंदाकिनी नदी किनारे बने आस्था पथ से मंदिर तक पहुंचेंगे.
2 मई से केदारनाथ यात्रा शुरू
लोक निर्माण विभाग ने दो वर्ष में 54 मीटर लंबे पैदल पुल का निर्माण किया है. इस पुल के बनने से हेलिपैड से मंदिर तक की दूरी भी कम हो गई है. आगामी 2 मई से केदारनाथ यात्रा शुरू होगी. इस वर्ष पैदल व हेलिकॉप्टर से धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु मंदाकिनी व सरस्वती नदी के संगम पर बने 54 मीटर लंबे पुल से होकर मंदाकिनी नदी किनारे निर्मित आस्था पथ के रास्ते लगभग 450 मीटर की दूरी तय कर मंदिर में पहुंचेंगे. यहां पर बाबा केदार के दर्शन कर श्रद्धालुओं को मंदिर मार्ग से वापस भेजा जाएगा.
पहले होती थी ये परेशानी
बीते दो वर्षों तक श्रद्धालु हेलिपैड से सरस्वती नदी किनारे बने आस्था पथ से होकर भैरवनाथ जाने वाले पुल से मंदिर तक पहुंच रहे थे. इस दौरान उन्हें लगभग 800 मीटर की दूरी तय करनी पड़ रही थी. लेकिन, अब संगम पर बने पुल से यह दूरी 500 मीटर रह गई है.
केदारनाथ आपदा में हुआ था भारी नुकसान
जून 2013 में आपदा से केदारनाथ में व्यापक नुकसान हो गया था. तब, सैलाब में संगम पर बना स्थायी पुल भी बह गया था. पुल के बहने के बाद मंदिर तक पहुंच के लिए बैलीब्रिज लगाया था. केदारनाथ पुनर्निर्माण के तहत वर्ष 2022 में स्थायी पुल का कार्य शुरू किया गया था, जो अब बनकर तैयार हेा चुका है.
क्या कहते हैं अधिकारी?
केदारनाथ में संगम पर 54 मीटर स्पान का पुल बनकर तैयार हो चुका है. इसी पुल से यात्रा का संचालन होगा. इस पुल के बनने से हेलिपैड से मंदिर तक की दूरी भी कम हो गई है.
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