देवी सती के 51 सिद्धपीठों में से एक कुंजापुरी मंदिर भी है जोकि अपनी खूबसूरती के चलते कई श्रद्धालुओं और पर्यटकों का ध्यान खींचता है. यह मंदिर टिहरी जले में ऋषिकेश-गंगोत्री राजमार्ग के पास असीम पहाड़ों की ऊंचाइयों पर स्थित है.
पहाड़ों पर बसे इस शक्तिपीठ का वैसे तो ज्यादातर रास्ता ट्रैकिंग का है जहां ऊंचे हिमालय पहाड़ और आस-पास के विहंगम व मनोरम दृश्यों की खूबसूरती सभी का ध्यान खींचती है. यहां हर साल नवरात्रि के मौके पर कुंजापुरी पर्यटन विकास मेले का आयोजन होता है. इस मंदिर से जुड़ी हुई कई पौराणिक मान्यताएं भी है जिसके चलते यह आस्था का प्रमुक केंद्र बन गया है.
पौराणिक मान्यताएं
कुंजापुरी मंदिर देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से भी एक है. इसे लेकर कई पौराणिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती के बाल (कुंज) गिरे थे जिस कारण इसका नाम कुंजापुरी पड़ा था. सकंध पुराण के केदारखंड के मुतबिक पौराणिक काल में जब प्रजापति दक्ष ने हरिद्वार (कनखल) में विशाल यज्ञ का आयोजन किया था. इस हवन में उन्होंने सभी देवी व देवताओं को आमंत्रित किया था वहीं अपनी ही पुत्री सती को निमंत्रण नहीं दिया. इसके बावजूद जब सती वहां पहुंची तो दक्ष ने शंकर (शिव) का घोर अपमान किया.
इससे आहत होकर देवी सती ने खुद को हवन कुंड में भस्मिभूत कर लिया. भगवान शिव को जब मालूम हुआ तो वो सती शरीर को उठाकर कैलाश की तरफ चलने लगे, इसी दौरान कई जगहों पर उनके अंग गिरे जो की आगे चलकर शक्तिपीठ बने.
जानें कैसे पहुंचे मंदिर?
बता दें कि नरेंद्रनगर ऋषिकेश से 12 किलोमीटर दूर है जहां से 16 किमी तक मिनी बस या टैक्सी करके पहुंचा जा सकता है. वहीं 11 किलोमीटर से आगे मार्ग संकरा होने के चलते केवल छोटे वाहनों को ही जाने की अनुमति है. इसके अलावा ट्रैकिंग करके भी पर्यटक जाना पसंद करते हैं जो की उन्हें विशेष आनंद देता है. यहां से नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश पड़ता है जबकि हवाई सेवा के लिए जौलीग्रांट एयरपोर्ट पड़ता है.
कब जाए कुंजापुरी मंदिर ?
वैसे तो कुंजापुरी मंदिर साल के सभी दिन खुला रहता है, मगर नवरात्रों के समय यहां की छटा देखते ही बनती है. शक्ति की उपासना को समर्पित इन 9 दिनों में यहां भव्य मेले का आयोजन किया जता है जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वहीं उत्तराखंड के दूर दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए जहां जाना पसंद करते हैं.
कुंजा देवी मंदिर का धार्मिक महत्व
कुंजा देवी मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है, जहां एक तरफ इस स्थान से जुड़ी हुई अपनी खास पौराणिक मान्यताएं हैं तो वहीं प्रकृति की गोद में बसा यह क्षेत्र अपनी खूबसूरती से भी लोगों को अपनी तरफ खींचता है. ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में मांगी गई सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सनराइज पॉइंट खींचता है ध्यान
कुंजादेवी स्थल में ही सनराइज पॉइंट है जहां से पहाड़ों से निकलता सूरज का दृश्य पर्यटकों को खूब लुभाता है. हिमालय के ऊंचे पहाड़ों के मनोरम दृश्य और सनराइज पॉइंट का आनंद लेने के लिए विदेशी पर्यटक यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.
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