देवनगरी हरिद्वार में भक्ति की बयार बह रही है. जहां एक तरफ नील पर्वत पर माता चंड़ी देवी का मंदिर है तो वहीं दूसरी तरफ शिवालिक पर्वत पर माता मनसा देवी विराजमान है जो अपने भक्तों को दर्शन दे रही है. माता मनसा देवी के मंदिर में असंख्य श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं. इसका धार्मिक और पौराणिक महत्व भी है. चैत्र नवरात्र में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है.
मनसा देवी मंदिर की धार्मिक और पौराणिक मान्यता है. पौराणिक मान्यता की मानें तो मां मनसा भगवान भोलेनाथ की मानस पुत्री है वहीं पुरातन ग्रंथों की मानें तो वो ऋषि कश्यप की पुत्री है. मनसा का शाब्दिक अर्थ मनोकामना होता है, ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले लोगों की सारी मनोकामनाएं मां देवी पूरी करती हैं. यहीं कारण है कि देश और दुनिया से श्रद्धालु शीश नवाने के लिए मंदिर पहुंचते हैं.
होती हैं सारी मनोकामनाएं पूरी
मान्यताओं के अनुसार जो लोग मंदिर में मुराद लेकर पहुंचते हैं, वो मनसा देवी के समक्ष पूजा-अर्चना करके वहां पेड़ पर धागा बांधते हैं. उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, इसके बाद वो धागा खोलकर भी आते हैं. एक मूर्ति की 10 भुजाएं एवं पांच मुख और दूसरी मूर्ति की अट्ठारह भुजी माता विराजमान हैं. मंदिर में स्थापित स्वयंभू प्रतिमा महिषासुर मर्दिनी के रूप में विराजमान है.
नवरात्र में पहुंचते है भक्त
मां मनसा देवी मंदिर में नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं का तांता लगता है. वहां ट्रॉली और पैदल ट्रेकिंग करके भक्त बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. इन दिनों वहीं मेला भी लगा रहता है. हरिद्वार में हरि के पौड़ी में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु इस दूरी को तय करके लोग वहां आना पसंद करते हैं. इसी मंदिर में मां ने महिषासु का वध करके देवताओं हर मनोकामना पूरी की थी तभी से उन्हें मनसा देवी नाम दिया गया था.
कैसे पहुंचे मंदिर?
बता दें कि मनसा देवी मंदिर बिलवा पर्वत पर स्थित है और हरिद्वार से 4.4 किमी की खड़ी चढ़ाई या रोपवे द्वारा पहुँचा जा सकता है. इसके अलावा सीढ़ी वाले रास्ते की मदद से भी मंदिर पहुंचा जा सकता है. यह मंदिर साल के सभी 365 दिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक खुलता है जहां दर्शन कर भक्त अपनी मुरादें पूरी कर सकते हैं.
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