नवरात्र के नौ दिन मां भवानी के नौ स्वरुपों को समर्पित है. नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. ब्रह्मचारिणी दो शब्दों से मिलकर बना है. जिसमें ब्रह्म का अर्थ तपस्या और चारिणी का अर्थ अचारण करने वाले. मां ब्रह्मचारिणी का स्वरुप श्वेत वस्त्र से लिपटी हुई कन्या है. मां के हाथों में अष्टदल की माला और दूसरे हाथ में कममंडल होता है.
कहा जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने वाले भक्तों की लंबी आयु,सुख-सौभाग्य, क्रोध और आलस्य जैसी दुष्प्रवृतियां दूर होती है.
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का शुभ मुहूर्त
नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का शुभ मुहूर्त का समय दोपहर 12 बजे से लेकर 12:50 मिनट तक रहेगा.
इस तरह करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त के समय पर उठकर स्नान करें. मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग सफेद है. ऐसे में भक्त पूजा के समय सफेद रंग के वस्त्र पहनें. इसके बाद माता के सामने एक दीपक जलाएं और फल-फूल, चंदन और अक्षत आदि रखें. फिर मां ब्रह्मचारिणी की आरती और मंत्र का जाप करें. मां को भोग लगाकर अपनी पूजा संपन्न करें.
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का मंत्र
– दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
– ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:
– दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
मां ब्रह्माचारिणी का प्रिय भोग
नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्माचारिणी को चीनी का भोग लगाए. माना जाता है कि चीनी का भोग लगाने से व्यक्ति को सभी तरह के रोगो से छुटकारा मिलाता है.साथ ही व्यक्ति की आयु लंबी होती है.
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