हाई कोर्ट ने विकास नगर स्थित इनामुल उलूम सोसायटी के बंद मदरसे पर सुनवाई की है. इस दौरान कोर्ट ने बंद पड़े मदरसे सील खोलने का निर्देश दिया है. हालांकि न्यायालय ने सख्त होते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को यह वचन देना होगा कि वह बिना सरकारी मान्यता के कोई मदरसा संचालित नहीं करेगा.
जानें पूरा मामला
न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई. याचिका इनामुल उलूम सोसायटी के अध्यक्ष जुबेर अहमद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए उनके परिसर को सील कर दिया. जिस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता तय नियमों का उल्लंघन कर मदरसा चला रहा था. सख्त होते हुए उन्होंने दलील दी गई कि यदि सील हटाई जाती है, तो याचिकाकर्ता दोबारा इस तरह की गतिविधियों में लिप्त हो सकता है.
दिया समुदाय का यह तर्क
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद-226 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि बिना सुनवाई का अवसर दिए उनकी संपत्ति को सील करना अवैध है. उन्होंने कहा कि अगर सोसायटी अपने उद्देश्यों से इतर कार्य कर रही थी, तो भी उसे अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए था.
कोर्ट ने शर्त के साथ दिए निर्देश
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने भवन की सील खोलने का आदेश दिया, लेकिन इस शर्त के साथ कि याचिकाकर्ता राज्य सरकार की मान्यता के बिना कोई मदरसा संचालित नहीं करेगा. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 जून की तारीख तय की है.
हिन्दुस्थान समाचार