देवभूमि उत्तराखंड में वैसे तो कई मंदिर है जहां नवरात्र के पावन दिनों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. ऐसा ही एक मंदिर माता गर्जिया देवी का पावन धाम जहां भक्ति और शक्ति के दिव्य समागम देखने को मिलता है. नैनीताल जिले के रामनगर तहसील में 15 किलोमीटर दूर सुंदरखाल में स्थित है. गर्जिया माता का ये मंदिर जिम कार्बेट नेशनल पार्क से केवल 10 किलोमीटर की दूरी पर है जहां ऊंचे टीले पर माता भवानी विराजती हैं. नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों का हुजूम देखते ही बनता है जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
जंगल खींचता है नेचर लवर्स का ध्यान
हरे-भरे जंगलों के बीच कोसी नदी के प्राकृतिक छटा से भरपूर ये मंदिर नेचर लवर्स और श्रद्धालुओं को बड़े पैमाने पर अपनी तरफ आकर्षित करता है. जहां देश और दुनियाभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. माता के दरबार तक पहुंचने के लिए भक्तों को 90 खड़ी सीढ़ियां चढ़कर जाना होता है. इसके बाद टीले पर माता गर्जिया अपने भक्तों को दर्शन देती हैं.
एक किंवदंती के अनुसार हजारों साल पहले कोसी नदी साथ मिट्टी का एक टीला बहकर आया था. उसे बटुक भैरव देवता ने देखकर उन्हें रोक लिया था. तब से ये टीला यूं ही वहां मौजूद है जहां पर्वतराज हिमालय की बेटी गर्जिया (पार्वती) के रूप में वहां विराजती हैं.
शेर आते हैं दर्शन के लिए
बता दें कि माता पार्वती गिरिराज हिमालय की बेटी यानी गिरिजा के नाम से भी जाना जाता है. जिसके चलते वहां लोग उन्हें गिरिजा या आम बोलचाल की भाषा में गर्जिया कहकर बुलाते हैं. यह नाम गिरिजा का ही अपभंश है. आसपास हरे भरे जंगल होने की वजह से यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है, कुछ लोग यहां माता की भक्ति तो कुछ प्राकृतिक खूबसूरती में लीन हो जाते हैं. प्रचलित स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर में शेर आकर माता की परिक्रमा करते हैं और दर्शन कर गर्जना हैं.
नवरात्र में दिखती है अद्भुत छटा
नवरात्र के दिनों में देवी गर्जिया मंदिर में अद्भुत रस देखने को मिलता है. अगर दर्शन करने का आप प्लान कर रहे हैं तो नवरात्र से अच्छा समय भला कौन हो सकता है जहां देश और दुनिया से भक्त देवी के दर्शन के लिए तमान कठिनाइयों को पार करके पहुंचते हैं. ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसके साथ ही कार्तिक पूर्णिमा पर यहां एक विशाल मेले का आयोजन होता है.