Dehradun: मानसून में इन दिनों उत्तराखंड की राह आसान नहीं है. सोमवार से भगवान शिव के प्रिय माह सावन के साथ कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई है. ऐसे में देवों का घर कहे जाने वाले देवभूमि उत्तराखंड में आस्था की डगर भी कठिनाई भरी होगी. हालांकि सुरक्षा के साथ हर स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. इधर, दून प्रशासन ने 23 जुलाई को इंटर मीडिएट तक के सभी विद्यालय बंद करने के आदेश दिए हैं.
वैसे तबाही बचाने को आतुर मानसून से जुलाई माह में राहत नहीं मिलने वाला है. प्रदेश भर में पल-पल मौसम बदल रहा है. मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. बिक्रम सिंह ने बताया कि 26 जुलाई तक प्रदेश भर में भारी बारिश का अनुमान है. कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली भी चमकने के आसार हैं. बारिश को लेकर मौसम विभान ने ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है. भारी बारिश के दृष्टिगत संवेदनशील स्थलों पर भू-स्खलन की संभावना बढ़ जाती है. इससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटित हो सकती है. ऐसे में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष जिलाधिकारी सोनिका ने देहरादून जनपद के कक्षा एक से 12 तक संचालित समस्त शैक्षणिक संस्थाओं और आंगनबाडी केंद्रों में 23 जुलाई को अवकाश घोषित किया है. मुख्य शिक्षाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी उक्त आदेश का अनुपालन कराएंगे.
नदियां उफान पर : उधमसिंह नगर व चंपावत के 94 लोग जलभराव से प्रभावित, बदला ठिकाना
भारी बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं. ऐसे में लोग अपना ठिकाना बदलने को मजबूर हैं. खतरे के दृष्टिगत सरकार और प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है और लोगों से सावधान व सतर्क रहने की सलाह दी है. संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने के साथ पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा न करने की अपील की है. वहीं आपदा प्रभावितों के लिए जगह-जगह राहत शिविर लगाए गए हैं. उधमसिंह नगर जनपद के खटीमा और सितारगंज तहसील क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर भारी बारिश के कारण जलभराव से प्रभावित सात परिवार के कुल 24 लोग वर्तमान में खटीमा में लगाए गए राहत शिविर में निवासरत हैं. वहीं चंपावत जनपद के पूर्णागिरी तहसील अंतर्गत हुड्डी नदी का जलस्तर बढ़ने से गत 21 जुलाई को छीनीगोट में प्रभावित 23 परिवारों के 70 लोगों को सुरक्षित स्थान एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज टनकपुर में शिफ्ट किया गया है. इनके जलपान व भोजन की व्यवस्था प्रशासन की ओर से की जा रही है.
कहीं भू-स्खलन तो कहीं गिरी चट्टान और धंसी सड़क, प्रदेशभर में सड़कों की हालत दयनीय
चट्टान गिरने, भू-स्खलन होने और बाढ़ के कारण सड़कों की भी हालत दयनीय है. प्रदेश भर में हर रोज आवागमन अवरुद्ध हो रहे हैं. सोमवार को भी प्रदेश भर में जगह-जगह आवागमन अवरूद्ध हो गया. जनपदवास सड़कों की स्थिति पर गौर करें तो सोमवार को रुद्रप्रयाग में चार ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध है. उत्तरकाशी में बिशुनपुर के पास भू-स्खलन होने से ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग-34 अवरुद्ध है. इसके अलावा एक राज्यमार्ग व आठ ग्रामीण मोटर मार्ग बाधित है. नैनीताल में भी ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध है. बागेश्वर में एक मुख्य जिला मार्ग व 14 ग्रामीण मोटर मार्ग, देहरादून में सात ग्रामीण मोटर मार्ग, पिथौरागढ़ में 23 ग्रामीण मोटर मार्ग, अल्मोड़ा में एक राज्यमार्ग व तीन ग्रामीण मार्ग, चंपावत में सात ग्रामीण मोटर मार्ग, पौड़ी गढ़वाल में 18 ग्रामीण मोटर मार्ग, चमोली में 15 ग्रामीण मोटर मार्ग, टिहरी में आठ ग्रामीण मोटर मार्ग, उधमसिंह नगर में एक राज्यमार्ग व एक ग्रामीण मोटर मार्ग अवरुद्ध हैं. मार्ग को सुचारू करने का कार्य गतिमान है.
बाढ़ में बहा पुल दो दिन से है बंद
अल्मोड़ा में खैरना-रानीखेत-रामनगर मोटर मार्ग (राज्यमार्ग-14) गत छह जुलाई से पूर्ण रूप से बंद है. नदी का जलस्तर बढ़ने से मोहान में बना पुल बह गया था. वैकल्पिक मार्ग वाया चिमटाखाल हरड़ा भौनखाल भतरौजखान का उपयोग किया जा रहा है. वर्तमान में यातायात की अस्थायी व्यवस्था के लिए उक्त स्थान पर 100 फीट बैली ब्रिज लगाने का कार्य गतिमान है. जुलाई के अंत तक पुल चालू होने की संभावना है.
प्रदेश भर में 50 रास्ते ब्लॉक, सुचारू कार्य में जुटी 48 मशीनें
लोक निर्माण विभाग उत्तराखंड की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार सोमवार को कुल 72 मार्ग अवरूद्ध हुए हैं. 37 मार्ग रविवार के अवरूद्ध थे यानी कुल 109 अवरूद्ध मार्गों में से 59 मार्गों को सोमवार को खोल दिया गया. शेष 50 मार्ग अवरूद्ध है. इसमें चार राज्यमार्ग, छह मुख्य जिला मार्ग, दो अन्य जिला मार्ग एवं 38 ग्रामीण मार्ग अवरुद्ध है. अवरुद्ध मागों को खोलने के लिए वर्तमान में राजमार्गों पर चार मशीन, मुख्य जिला मार्ग पर छह मशीन, अन्य जिला मार्ग पर दो मशीन तो ग्रामीण मार्गों पर 36 मशीन कुल 48 मशीनें कार्य कर रही हैं.
हिन्दुस्थान समाचार